Sankat Mochan Hanuman Ashtak in Maithili PDF-Hanuman Ashtak Lyrics in Maithili With Meaning Download PDF

Sankat Mochan Hanuman Ashtak in Maithili PDF-Hanuman Ashtak Lyrics in Maithili With Meaning Download PDF: हनुमान अष्टक आगामी रास्ते में उपयोगी है। पढ़ू नितंब दुर्घटना सं बरी भ सकैत अछि. हनुमान जी अपन अपार शक्ति स खेलाइत ऋषि-मुनि आ समस्त जगत लेल समस्या पैदा क सकैत छथि । (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

एहि समस्या के बाद शेषद कै के गारि पढ़ैत अछि, जे शक्ति के सुनैत अछि, शक्ति के उद्धार भ जाइत अछि | ओ बल आ माहीक दुखक अंतक प्रार्थना करैत छथि । खदिके हनुमान सालिश के दारुमन अष्टक परायण दुर्घटना के बाद बहुत उपयोगी आ अंतर्दृष्टि वाला अछि | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

Hanuman Ashtak in Maithili PDF
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हनुमान अष्टक के लिखलनि ?

हनु अष्टक के रचना पंडित गोस्वामी तुलसीदास केने छलाह | यक शंकट मोचन हनुमान अष्टका बाघ के चिन्हल जा सकैत अछि एहि 8 शब्द के कारण | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

हनुमान अष्टक पाठ पूजा विधि क्या है?

8th मार्ग कंठल दक्षिणमुख काम अव त है आदि बारा आओ प्रागरिया ला पिच हनुमान जीव आ श्री मुख्त क्रिया जीव मूवी अपन पूजा सनत बही। एहि जप के बाद हनुमान सालिश आ हनुमान अष्टक भाट अम्बा करक। घी या जचमीन तेल, गुड़ के फूल और गरम या गरम गुड़ के आटा के हनुमान दीप : लड्डू अगपक | अबुनी बबली दिनपावे या 21: एहि कोठली मे रेजिशन। (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

हनुमान की होइत अछि ?

संस्कृत शब्द ‘अनुमान’ के अर्थ उलियाले या चोल बिहाल के व्यक्ति | मुदा देखू जेगुमन (संस्कृत) नामक मिथक देवज इन्द्रीक गर्जनसँ चकनाचूर भ’ जाइत अछि ।

Hanuman Ashtak in Maithili PDF
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हनुमान जी अवतार के नाम क्या है?

दुर्लभ मामला में भीतर के जिसुमन जीव के मृत्यु शैशव अवस्था में भेल छल, जे मोहर के पहिल आ मूल नाम छल | * अंजना देवी पुली के सेहो पता चलै छै जे बाबा अंजनीपुत्र आ अंजना पुली के सेहो स्वीकार करै छैथ। काठिकेजन पित्रु केचरीबा के नाम से भी जाना जाता है | हनुमान स्लिच बहुत देओंग केचरिन्दरबुत्तर बजलाह। (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

हनुमानजीत गिमन के आदत?

वेद आ लोक मान्यता के अनुसार हनुमान जी के विवाह बाद में जीव के संग भेल छल |

हनुमान जी के विवाह भ गेल अछि?

रुमन के जन्म महर्षि गौतम के पत्नी पंजिका हानी अर्थात अंजनी के गर्भ से भेल छल | गौतम ऋषि के जखन अंजनी के गर्भ के बारे में पता चललैन त राजा केचरी आ दीदिया सेहो पध्याय चुनाव के दौरान अंजनी के अंगरक्षक बनि गेलाह | रिकार्ड मे नहि। हनुमान जी के जन्म के बाद माँ अंजनी हनुमान जी के बानर के रूप में बजा क शिव के रूप में पूछलखिन | (हनुमान अष्टक पंजाबी पीडीएफ मे)

तखन हनुमान पाथर पर खसि पड़लाह आ पिघलि गेलाह। पतन मे ओकर टांग टूटि गेल छलैक। बहाद केचारी मे अछि आ हनुमान जी उड़ा दैत छथि ।

ऐतिहासिक घटना पर आधारित लोक मान्यता के अनुसार हनुमान जी के जन्म विवादित परिस्थिति में भेल छल | यैह कारण अछि जे माँ अंजना आ हनुमान जी ऋषि गौतमक आश्रम खुजल रखने छथि | हनुमानजी केतिया केचही राज्यक उत्तराधिकारी नहि छलाह | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

लोककथा माता आना आ शुमन्चिपासमन् कपिक्य कुरक शासनकालक अनुसरण करैत अछि : पंचत अनाथ हुनब लाख होई | अस्थान बतबैत छथि जे हनुमान केतिया जँ दाम्पत्य आनंद नहि प्राप्त करैत छथि तँ पिताक मित्रता अपूर्ण अछि आ गजीव केतिया अम्बू नहि छथि | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

Hanuman Ashtak in Maithili PDF
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वेद आ लोक मान्यता के अनुसार हनुमान जी के विवाह बाद में जीव के संग भेल छल | शास्त्र परमचरित के अनुसार हनुमान जी के रावण के साथ युद्ध के अनुसार हुनकर सब बेटा युद्धबंदी छल | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

सतीतिक जन्म वरुण कृष्ण, हनुमान जी के जन्म रावण से | रुमान : पतनिगुसुम प्रकाश बम सहीद अनास्त्रित वेद, की अहाँ के नै बुझल अछि, “त-हरण प्रजा क दुशन-हदया कबर असुर मालजाने जे हनुमान अथिया हरतक शोलसुद, होते अहतिया हरतक शोलसुद। (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

स्वाख जीवन ई हनुमान जी केतिया खुश नै छैथ। परोपकार हुनकर जीवनक लक्ष्य छनि। विवाहक बाद वैवाहिक संबंध मे सेहो लागल रहैत छथि । हनुमानजीक जीवनक उद्देश्य भगवानक सेवा आ दिव्य शक्तिक सत्य अछि | तान्या दल ईजन हनुमान, त्रिजन राजपथ, अनरी अरण्य दुक-कष्ट सहाय राम, सुख, आनन्द एवं सुख के बाद : पाठ संरचना की संरचना | (Hanuman Ashtak in Maithili PDF)

हनुमान : अहाँक कतेक बेटा अछि ?

कुमनजीक पुत्रक जन्म होइत छैक जे पसीना बहैत छैक आ युद्धक शिकार भ’ जाइत छैक |

संकट मोचन हनुमान अष्टक पाठ

जखन अहाँ अपन बचपन मे भगवानक भोजन लेलहुँ तखन तीनू लोक अन्हार भ गेल ।

ताहि लेल दुनियाँ विपत्ति मे पड़ि गेल, जाति एहि संकट सँ किएक नहि बचि सकल।

कारी बंटी पर देवन तखन दीप छोड़ू प्रभु, पीड़ा दूर करू।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

बाली के हाहाकार खसल, जाति महाप्रभु पंथ निहारो।

जहिया स महा मुनि गारि देलखिन तखन, गरीब लोक के केकरा चाही।

महाप्रभु, त अहाँ दास के शोक दूर करू।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

अंगद के साथ समय लेलक, खोज कॉपी, बढ़ाउ ई प्रतिबंध।

जँ जीवन नहि बचल अछि तऽ बिना कोनो जागरूकता अनने एतय सुतैत छी ।

सिन्धु के कात में सब थाकि गेल अछि, जान बचाबय लेल सिया-सुधी आनू।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

रावण सबके एकटा त्रासदी देने छै, राक्षस जकाँ, कतहु शोक नै करू।

ओहि समय हनुमान महाप्रभु, जाउ महा रजनीचर केँ मारि दियौक।

चहत सिय अशोक सो आगि सु, दै प्रभु मुद्रा शोक निवारो।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

जखन अहाँ अपन लचिमानक बाण मारब तखन सुतल रावण केँ मारि दियौक।

लाई गृह बैद्य सुशेन एक साथ, तबई गिरी द्रोना सु बीर उपरो ॥

जखन अहाँ हमरा जीबैत हाथ देलहुँ तखन लचिमनक जान बचा लैत छी ।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

रावण जखन युद्धक आह्वान केलक तखन सभ माथ साँपक जाल मे फेकि देल गेल ।

श्रीघुनाथ सहित सब दल एहि संकट स मोहित अछि।

Ani Khagees तखन हनुमान जू बचन काटी सुइटरे निवारो .

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

जखन अहिरावन अपन भाइ सभक संग लाई रघुनाथ पाटल सिधारो।

भगवती के पूजा नीक विधि आ बलिदान स होइत अछि, सब मंत्र गरीब लोक के दियौ।

तखने अहाँकेँ मदद भेटत, अहिरावन सेहो सेनाक संग मारल जाएत।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

अहाँ एकटा पैघ देवन के काज केलौं, देखू वीर महाप्रभु।

गरीबक कोन खतरा, जे अहाँसँ दूर नहि जाइत अछि ।

बेगी हारो हनुमान महाप्रभु, जिनका विपत्ति मे पड़ि सकैत छथि ।

के नहि जनैत अछि जे दुनिया मे एकटा प्रतिलिपि अछि, संकटमोचन तिहारो के नाम।

, २. दोहा

लाल देह लाली लसाई, अरु धारी लाल लंगुर।

गरज शरीर राक्षस दलान, जय जय जय कपिशुर ॥

संकट मोचन हनुमान अष्टक पथ का अर्थ

जखन हम बच्चा रही तखन हम रौद खाइत छलहुँ,

तीनू लोक अन्हार भ’ गेल।

ताहि लेल दुनिया मे घबराहट अछि,

जाति के एहि संकट स कियैक नहि बचाबैत छी।

देवन आनी करी अनुरोध तखन,

दीप छोड़ू, दर्द सँ मुक्ति पाउ।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥१॥

साधन- हे बजरंगबली हनुमान जी! नेनपन मे अहाँ सूर्य केँ लाल फल बुझि गलती सँ निगल गेल छलहुँ, जकर कारणेँ तीनू लोक अन्हार भ’ गेल छल । एकर कारण पूरा दुनिया मे एकटा पैघ विपत्ति आबि गेल। मुदा एहि संकट के कियो दूर नहि क सकल। जखन सब देवता आबि क’ अहाँ सँ भीख मंगलनि तखन अहाँ अपन मुँह सँ सूर्य निकालि लेलहुँ आ एहि तरहें समस्त संसारक दुख दूर भ’ गेल। हे बानर सदृश हनुमान जी, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्तिक नाशक कहल जाइत छी |

बाली के परेशानी स्थिर भ गेलै, .

गिरी जाट महाप्रभु पंथ निहारो।

चूँकि महामुनि तखन गारि पढ़ने छलाह,

कोन-कोन विचारक आवश्यकता अछि?

महाप्रभु, जे द्वैत रूप मे छथि

तेँ अहाँ दासक दुख दूर करू।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥२॥

साधन- महाराज सुग्रीव अपन जेठ भाई बाली के भय के कारण किष्किन्धा पर्वत पर रहैत छलाह | महाप्रभु श्री राम जखन लक्ष्मणक संग ओतय सँ विदा भ’ रहल छलाह तखन सुग्रीव अहाँ केँ हुनका खोजय लेल पठौलनि | ब्राह्मणक भेष मे अहाँ भगवान श्री राम सँ भेंट कए हुनका संग अनलहुँ, जाहि सँ महाराज सुग्रीव केँ हुनकर दुख सँ बाहर निकालि हुनकर दुःख दूर कयलनि | हे बजरंगबली, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्ति के नाशक कहल जाइत छी |

सिय अंगद के साथ गेलै,

खोज एहि प्रतिबंध के कॉपी करू।

हम सब नहि बाँचब

बिना कोनो सुधार अनने एतय भटकब।

सिन्धु के तट पर सब थाकि गेल अछि तखन,

लाया सिया सुधि प्राण उबारो।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥३॥

माने- महाराज सुग्रीव, अंगदक संग बानर सभकेँ सीता माताक खोजमे पठबैत काल कहने छलाह जे जँ सीता माताकेँ नहि पाबि एतय घुरब तँ सभकेँ मारल जाएत। सब कियो खोजला के बाद निराश भ गेलौं, तखन अहाँ विशाल सागर पार क लंका गेलौं आ सीताजी के भेटल, जाहि स सबहक जान बचि गेल। हे बजरंगबली, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्ति के नाशक कहल जाइत छी |

रावण सिया के परेशानी देलकै तखन,

जँ अहाँ राक्षस छी तँ कतहु कानब छोड़ि दियौक।

ओहि समय हनुमान महाप्रभु, २.

जाउ महा रजनीचर के मारू।

चहत सिय अशोक सो आगि सु, २.

ओह भगवान मुद्रा सोक निवारो ॥

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥४॥

साधन- अशोक वाटिका मे रावण सीताजी केँ आहत केलनि, भय देखौलनि आ सभ राक्षस केँ सीताजी केँ मनाबय लेल कहलनि, तखन ओही समय अहाँ ओतय पहुँचि राक्षस केँ मारि देलहुँ | जखन सीता माता अशोक गाछ स आगि के आग्रह केलनि जे ओ अपना के राख क राखि क राखि सकथि, तखन केवल अहाँ अशोक गाछ के ऊपर स भगवान श्री राम के अंगूठी हुनकर गोदी में राखि देलहुं, जाहि स माता सीता शोक स मुक्त भ गेलीह। हे बजरंगबली, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्ति के नाशक कहल जाइत छी |

तीर मारल उर लचिमन तखन,

प्राण ताज्यो सुत रवन मारो।

सहित लाई गृह वैध्य सुशेन, 1999।

तबाई गिरी द्रोना सुबीर उपरो ॥

तखन अहाँ हमरा एकटा जीवित हाथ देलहुँ,

अहाँ लचिमनक जान बचाउ।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥५॥

माने- जखन मेघनाथ लक्ष्मणक छाती मे तीर मारि ओकरा बेहोश क’ देलक। ओकर जान खतरा मे चलि गेलै। तखन अहाँ घरक संग वैध्य सुशेन केँ अनलहुँ आ द्रोण पर्वतक संग संजीवनी जड़ी-बूटी सेहो अनलहुँ जाहि सँ लक्ष्मण जीक जान बचि गेल | हे महावीर हनुमान जी, जे एहि संसार मे छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्तिक नाशक कहल जाइत छी |

रावण अज़न सँ लड़ल तखन,

सबहक माथ साँपक जाल मे फेकि दियौक।

श्री रघुनाथ सहित सभी दल,

अहाँ एहि संकट पर मोहित भ’ जाउ।

आनी खगेस तबाई हनुमान जू, ८.

टाई काटि कए धागा स मुक्ति पाउ।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥६॥

साधन- रावण भयंकर युद्ध लड़ैत काल भगवान श्री राम आ लक्ष्मण सहित सभ योद्धा केँ साँपक पाश मे पकड़ि लेलक | तखन श्री राम सहित सम्पूर्ण बानर सेना विपत्ति मे पड़ि गेल, तखन अहाँ गरुदेव केँ आनि सब केँ साँपक जाल सँ मुक्त क’ देलियैक। हे महावीर हनुमान जी, जे एहि संसार मे छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्तिक नाशक कहल जाइत छी |

अहिरावन अपन मित्रक संग, २.

लाय रघुनाथ पाटल सिधारो।

भगवान् केरऽ पूजा अच्छा तरीका स॑ करलऽ जाय छै,

सब के त्याग करू, मंत्र सोचू।

तखने अहाँकेँ मदद भेटत।

सेना के साथ अहिरावन के मारना।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥७॥

माने- जखन अहिरावण श्रीराम आ लक्ष्मण केँ उठा क’ पाटल लोक मे अपना संग ल’ गेलाह त’ ओ देवी केँ ठीक सँ पूजा केलनि आ सब सँ परामर्श क’ निर्णय लेलनि जे एहि दुनू भाइ केँ बलि देब, संगहि अहाँ ओतय पहुँचि भगवान श्रीराम, अहिरावण केर सहायता केलहुँ। अपन सेनाक संग मारल गेल। हे बजरंगबली हनुमान जी, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्तिक नाशक कहल जाइत छी |

अहाँ महान परमेश् वरक काज केलहुँ,

वीर महाप्रभु के बारे में सोचिये।

गरीबक कष्ट के अछि,

जे अहाँ लग नहि जाइत अछि तारो।

बेगी हारो हनुमान महाप्रभु, ८.

हमर संकट जे किछु अछि।

दुनियाँ मे प्रतिलिपि के नहि जनैत अछि,

संकट मोचन नाम तिहारो ॥८॥

माने- हे वीर के पराक्रमी महाप्रभु, अहाँ देवता के लेल पैघ काज केलौं। आब अहाँ हमरा दिस तकैत छी आ सोचैत छी जे हमरा गरीब पर केहन संकट आबि गेल अछि जकर समाधान अहाँ नहि क’ पाबि रहल छी। हे महाप्रभु हनुमान जी, हमरा पर जे कोनो संकट आयल अछि, ओकरा दूर करू। हे बजरंगबली, एहि संसार मे के छथि जे नहि जनैत छथि जे अहाँ सब विपत्ति के नाशक कहल जाइत छी |

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